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अलंकार किसे कहते हैं

अलंकार किसे कहते हैं | अलंकार की परिभाषा |अलंकार कितने प्रकार के होते हैं

अलंकार किसे कहते हैं और अलंकार कितने प्रकार के होते हैं। अलंकार से जुड़ी विस्तृत जानकारी इस लेख में दी गई है अलंकार की परिभाषा एवं उनके उदाहरण दिए गए हैं।

अलंकार किसे कहते हैं?

अलंकरोति इति अलंकार अर्थात् जो अलंकृत करता है, वही अलंकार है।

अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित

भ्रान्तिमान अलंकार

भ्रान्तिमान अलंकार की परिभाषा – काव्य में समानता के आधार पर जब एक वस्तु का भ्रम दूसरी वस्तु में हो जाता है, तो उसे भ्रान्तिमान अलंकार कहते हैं।

भ्रान्तिमान अलंकार के उदाहरण

1. “समुझि तुम्हे धनयम हरि।

नाच उठे बन मोर ॥”

2. बिल विचार कर नागशुण्ड में घुसने में घुसने लगा विषैला साँप।

काली ईख समझ विषधर को, उठा लिया तब गजने आप।।

संदेह अलंकार

संदेह अलंकार की परिभाषा – काव्य में समानता के कारण जब एक वस्तु का संशय (संदेह) दूसरी वस्तु में हो जाता है और लम्बे समय तक बना रहता है, उसे संदेह अलंकार कहते हैं।

संदेह अलंकार के उदाहरण

1. “सारी बीच नारी है, कि नारी बीच सारी है।

सारी ही की नारी है, कि नारी ही की सारी है।”

2. यह काया है या शेष उसी की छाया।

न क्षण भरे उनकी कुछ नहीं समझ में आया॥

व्यतिरेक अलंकार

व्यतिरेक अलंकार की परिभाषा – काव्य में जब उपमेय की उपमान से श्रेष्ठता प्रकट की जाती है, उसे व्यतिरेक अलंकार कहते हैं।

व्यतिरेक अलंकार के उदाहरण

1. साधू ऊँचे शैल सम किन्तु प्रकृति सुकुमार।

2. जिनके यश प्रताप के आगे।

ससि मलीन रवि सीतल लागे।।

विरोधाभास अलंकार

विरोधाभास अलंकार के उदाहरण

1. या अनुरागी चित्त की, गति समुझे नहीं कोय।

ज्यों-ज्यों बूढे श्याम रंग, त्यौ-त्यौं उज्ज्वल होय।।

2. ‘बैन सुन्या जबतें मधुर तबतें सुनत न बैन।

सांगरूपक अलंकार

सांगरूपक अलंकार की परिभाषा जब काव्य में उपमेय में उपमान का अंगो सहित आरोप किया जाए, वहाँ सांगरूपक अलंकार होता है।

सांगरूपक अलंकार का उदाहरण

1. उदित उदयगिरि मंच पर, रघुवर बाल मतंग।

विकसे सन्त सरोज सब, हरषै लोचन भृंग।।

व्याजनिंदा अलंकार

व्याजनिंदा अलंकार की परिभाषा – जब कथन में देखने या सुनने पर प्रशंसा सी जान पड़े, किंतु वास्तव में निंदा हो, व्याजनिंद अलंकार होता है।

व्याजनिंदा अलंकार का उदाहरण

1. राम साधु, तुम साधु सयाने।

राम मातु, भलि सब पहचाने।।

मानवीकरण अलंकार

मानवीकरण अलंकार की परिभाषा – जब प्राकृतिक वस्तुओं (पेड़, पौधे, बादल) में मानवीय भावना का वर्णन हो, यानी निर्जीव वस्तुओं में सजीव होना दर्शाया जाए तब मानवीकरण अलंकार होता है।

मानवीकरण अलंकार का उदाहरण

1. फूल हंसे, कलिया मुस्काई।

व्याजस्तुति अलंकार

व्याजस्तुति अलंकार की परिभाषा – जब कथन को सुनने या देखने पर निंदा सी दिखाई पड़ती है, परंतु वास्तव में प्रशंसा हो, व्याजस्तुति अलंकार होता है।

व्याजस्तुति अलंकार का उदाहरण

1. गंगा क्यों टेड़ी चलती हो।

दुष्टों को शिव कर देती हो।।

उपमा अलंकार

उपमा अलंकार की परिभाषा – जहां किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना या समानता का वर्णन किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के स्वभाव, स्थिति, रूप और गुण से की जाए, वहा उपमा अलंकार होता है। इसमें वाचक शब्द सा, सी, से, सम और समान आदि होते है।

उपमा अलंकार का उदाहरण

1. हरि पद कोमल कमल से।

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार की परिभाषा – जिस काव्य में क्रमशः शब्दों की आवृत्ति एकसमान होती है, परंतु अर्थ की भिन्नता नही होती है, वहां पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है।

पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार का उदाहरण

1. दिन जल्दी जल्दी ढलता है।

विभावना अलंकार

विभावना अलंकार की परिभाषा – जब कारण न होने पर भी कार्य का करना या होना पाया जाता है, वहां विभावना अलंकार होता है।

विभावना अलंकार का उदाहरण

1. बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना, कर बिनु करम करई विधि नाना।

आनन रहित सकल रस भोगी, बिनु वाणी वकता बड़ जोगी।।

विशेषोक्ति अलंकार

विशेषोक्ति अलंकार का उदाहरण

1. देखो दो दो मेघ बरसते।

मैं प्यासी की प्यासी।।

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