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आलोक धन्वा का जीवन परिचय

आलोक धन्वा का जीवन परिचय | Alok Dhanwa ka jeevan parichay

hinditoper.com द्वारा लिखे गए आलोक धन्वा का जीवन परिचय कक्षा 12 के इस लेख में आलोक धन्वा का जीवन परिचय (Alok Dhanwa ka jeevan parichay) दिया है, जिसमें Alok Dhanwa का जन्म, प्रमुख रचनाएं, सम्मान तथा आलोक धन्वा का जीवन परिचय संबंधित भाव पक्ष – कला पक्ष तथा साहित्य में स्थान निम्न है –

आलोक धन्वा का जीवन परिचय-Alok Dhanwa ka jeevan parichay

जन्म – 2 जुलाई सन 1948, मुंगेर (बिहार) में

प्रमुख रचनाएं –

नई कविताएं : ओस, रेशमा, चेन्नई में कोयल, रात, उड़ाने, सवाल ज्यादा है, बारिश, पाने की लड़ाई, मुलाकाते, आम के बाग, नन्हीं बुलबुल के तराने, गाय और बछड़ा, फूलों से भरी डाला आदि।

काव्य रचनाएं : जनता का आदमी, भागी हुई लड़कियां, कपड़े के जूते, ब्रूनो की बेटियां, गोली दागो पोस्टर आदि कई।

प्रमुख सम्मान – हिंदी साहित्य के महानतम कवि आलोक धन्वा को कई सम्मानों से सम्मानित किया गया है, राहुल सम्मान, नागार्जुन सम्मान, पहल सम्मान, बिहार राष्ट्र भाषा परिषद का साहित्य सम्मान, बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, फिराक गोरखपुरी सम्मान, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, भवानी प्रसाद मिश्र स्मृति सम्मान आदि कई।

वर्तमान में 76 वर्ष की उम्र

आलोक धन्वा का जीवन परिचय

आलोक धन्वा का जीवन परिचय (भाव पक्ष – कला पक्ष)

आलोक धन्वा की काव्यगत विशेषताएं (भाव पक्ष – कला पक्ष) निम्न है –

भाव पक्ष – Alok Dhanwa

राष्ट्रीय चेतना : आलोक धन्वा जी की कविताओं में राष्ट्र के प्रति प्रेम, भक्ति और राष्ट्रीय चेतना का उल्लेख विशेष रुप से मिलता है। राष्ट्र के प्रति लिखी गई इनकी रचनाएं श्रोताओं और पाठकों के मन में गर्व और उत्साह का भाव जागृत करती है।

कला पक्ष – Alok Dhanwa

भाषा : आलोक धन्वा की काव्य भाषा शुद्ध साहित्य खड़ी बोली है। भाषा में सरलता, सहजता और प्रवाह है। भाषा में यथास्थान संस्कृत के तत्सम, तद्भव तथा देशज – विदेशज शब्दों का भी बहुलता से प्रयोग किया है। भाषा सरल होने के कारण पाठक और श्रोताओं को रचना का भाव स्पष्ट रूप से समझ आ जाता है।

शैली : अपनी काव्य रचनानुसार आलोक धन्वा जी ने कई शैलियों का प्रयोग किया है। जिनमें से कुछ शैली निम्न है –

  • वर्णनात्मक शैली – आलोक धन्वा जी ने अपनी रचनाओं में जहां – जहां घटनाओं, प्रकृति का चित्रण, स्थानों का वर्णन किया है, वहां वर्णनात्मक शैली का प्रयोग किया है।
  • भावात्मक शैली – सरल भाषा होने के कारण तथा शब्दों के अनूठे चयन से इनकी काव्य रचनाओं में जो भाव है वह प्रमुखता से झलकते है।

इनके अतिरिक्त अन्य कई शैलियों का प्रयोग किया है।

अलंकार और छंद : अलंकार प्रिय आलोक धन्वा जी ने अपनी रचनाओं में अलंकारों को विशेष तरीके से समायोजित किया है जिससे उनकी रचनाएं और भी प्रभावपूर्ण बन गई है साथ ही साथ छंदों का भी उचित ढंग से उपयोग किया है।

साहित्य में स्थान – Alok Dhanwa

साहित्य में स्थान – हिंदी साहित्य जगत के अद्वितीय कवि आलोक धन्वा जी की रचनाएं मानवीय भावनाओं से ओत प्रोत है। इनकी रचनाएं साहित्य जगत की अनमोल धरोहर है। अपनी रचनाओं के माध्यम से साहित्य प्रेमियों के हृदय में अपना विशेष स्थान बनाया है।

FAQ – Alok Dhanwa ka jeevan parichay

आलोक धन्वा जी की पहली कविता कौनसी थी?

आलोक धन्वा जी की पहली कविता “जनता का आदमी” थी। जो सन 1972 में बाल पत्रिका में प्रकाशित हुई थी।

आलोक धन्वा किस युग के कवि है?

आलोक धन्वा समकालीन हिंदी काव्यधारा के कवि हैं। जिनका जन्म 2 जुलाई सन 1948, मुंगेर (बिहार) में हुआ था।

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