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कुंवर नारायण का जीवन परिचय

कुंवर नारायण का जीवन परिचय class 12 | kunwar narayan ka jivan parichay

hinditoper.com द्वारा लिखे गए कुंवर नारायण का जीवन परिचय class 12 के इस लेख में कुंवर नारायण का जीवन परिचय (kunwar narayan ka jivan parichay) दिया गया है, जिसमें कुंवर नारायण जी का जन्म, प्रमुख रचनाएँ, सम्मान, निधन तथा कुंवर नारायण जी का जीवन परिचय संबंधित काव्यगत विशेषताएं निम्न है –

कुंवर नारायण का जीवन परिचय class 12

जन्म – 19 सितंबर सन 1927 में (उत्तर प्रदेश)

प्रमुख रचनाएं –

काव्य संग्रह : चक्रव्यूह, परिवेश हम तुम, अपने सामने, कोई दूसरा नहीं, इन दिनों।

प्रबंध काव्य : आत्मजयी

कहानी संग्रह : आकारों के आस पास

समीक्षा : आज और आज से पहले

प्रमुख सम्मान – साहित्य अकादमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, प्रेमचंद पुरस्कार, व्यास सम्मान, लोहिया सम्मान, कबीर सम्मान और कुमारन आशान पुरस्कार आदि कई।

पत्रिका – नया प्रतीक (मासिक पत्रिका के सदस्य), तनाव पत्रिका

निधन – 25 नवंबर सन 2017, दिल्ली में

विशेष – भारत सरकार द्वारा सन 2009 में पद्म भूषण पुरुस्कार से सम्मानित।

कुंवर नारायण का जीवन परिचय

काव्यगत विशेषताएं (भाव पक्ष – कला पक्ष)

साहित्य जगत के महान कवि कुंवर नारायण जी की काव्यगत विशेषताएं (भाव पक्ष – कला पक्ष) निम्न है –

भाव पक्ष – कुंवर नारायण का जीवन परिचय

मानवीय संबंधों का चित्रण : कुंवर नारायण जी ने अपनी साहित्यिक यात्रा में मानवीय संबंधों को एक विशेष आयाम दिया है। अंधविश्वास और विसंगतियों के प्रति जो गुस्सा है वह उनकी रचनाओं में स्पष्ट रूप से झलकता है।

वैज्ञानिक दृष्टिकोण : भ्रमण करने में रुचि रखने वाले कुंवर नारायण जी ने साहित्यिक विधाओं का आंतरिक तथा गहन अध्ययन किया है जिसके अनुभव के फल स्वरुप नारायण जी का अन्य कवियों के प्रति अपना एक विशेष दृष्टिकोण है।

कविता एक उड़ान है चिड़िया के बहाने

कविता की उड़ान भला चिड़िया क्या जाने

बाहर भीतर

इस घर, उस घर

कविता के पंख लगा उड़ने के माने

चिड़िया क्या जाने?

कला पक्ष – कुंवर नारायण का जीवन परिचय

शैली : कुंवर नारायण जी की शैली विषयानुसार है, अपनी काव्य रचनाओं के अनुसार उन्होंने शैली का इस्तेमाल किया है –

  • विचार प्रधान शैली : गहन और गंभीर विषय पर विचार प्रकट करने के लिए कुंवर जी ने इस शैली का प्रयोग किया है।
  • वर्णनात्मक शैली : घूमने फिरने के शौकीन कुंवर नारायण जी ने कई वस्तुओं, स्थानों, घटनाओं तथा प्रकृति का वर्णन करने के लिए इस शैली का प्रयोग किया है।
  • भावात्मक शैली : अपने भावों को आम जनमानस, पाठक, श्रोताओं तक पहुंचाने के लिए इस शैली का बखूबी प्रयोग किया है।

मुहावरे तथा लोकोक्तियों का प्रयोग : अपनी काव्य रचनाओं में गति प्रदान करने तथा विशेष भार डालने के लिए मुहावरों और लोकोक्तियों का प्रयोग किया है।

साहित्य में स्थान – kunwar narayan ka jivan parichay

साहित्य में स्थान – कुंवर नारायण जी ने कविता के साथ – साथ साहित्य की अन्य विधाओं में भी अपनी रचनाओं को लिखकर पाठक तथा श्रोताओं के हृदय में अपना एक विशेष स्थान बनाया है। परंतु कविता की विधा से हिंदी साहित्य में एक विशेष पहचान मिली है। आपकी रचनाएं हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर है। अपनी इन रचनाओं के लिए आप सदैव साहित्य प्रेमियों के लिए स्मरणीय रहेंगे।

FAQ – kunwar narayan ka jivan parichay

कुंवर नारायण जी किस युग के कवि माने जाते हैं?

कुंवर नारायण जी नई कविता युग के कवि माने जाते हैं।

कुंवर नारायण जी कौन से तार सप्तक के कवि थे?

सन 1959 में अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरे तार सप्तक के प्रमुख कवियों में से एक कुंवर नारायण जी थे।

कुंवर नारायण जी की भाषा कैसी है?

कुंवर नारायण जी की भाषा शुद्ध साहित्य खड़ी बोली है। कठिन भाषा से बचने का सदैव प्रयास किया तथा सरल भाषा में अपनी रचनाएं लिखी।

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