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पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्दों में | Paryavaran pradushan nibandh pdf

पर्यावरण प्रदूषण हमारे जीवन के लिए खतरा बन गया है, पर्यावरण प्रदूषण की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है पर्यावरण प्रदूषण हमारे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है पर्यावरण प्रदूषण का अर्थ होता है, हमारे द्वारा उत्पन्न किए गए विभिन्न प्रकार के प्रदूषणों के कारण हमारे पर्यावरण को क्षति पहुंच रही है।

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्दों में

पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध हिंदी में 500 शब्दों में विस्तृत लेखन प्रस्तुत है –

रूपरेखा –

  1. प्रस्तावना
  2. वैज्ञानिक प्रगति और प्रदूषण
  3. वायु प्रदूषण
  4. ध्वनि प्रदूषण
  5. जल प्रदूषण
  6. प्रदूषण का घातक प्रभाव
  7. पर्यावरण शुद्धि हेतु वृक्षारोपण
  8. उपसंहार

प्रस्तावना –

मानव प्रगति पर अपना अधिकार जमाने की धुन में वैज्ञानिक प्रगति के नाम पर प्रगति को स्वामिनी से सेविका बनाना चाहता है। प्रकृति की गोद में विकसित होने वाले फल, सुंदर लताएं, हरे-भरे वृक्षों तथा चहचहाते पक्षी अब उसके आकर्षण के केंद्र बिंदु में नहीं रहे प्रकृति का स्वच्छंद वातावरण भूतकाल में विलीन हो गया है। मानव अपने मन की इच्छा और नई-नई वैज्ञानिक खोजों ने प्रगति के कार्यों में हस्तक्षेप करना प्रारंभ कर दिया है जिसका हमारे प्राकृतिक संस्थानों और सांस्कृतिक धरोहर पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

वैज्ञानिक प्रगति और प्रदूषण –

वायु प्रदूषण-

वायु में मिले हुए विभिन्न धूल के कण, धुआं और हानिकारक वायुमंडल की गैसों के कारण वायुमंडल की गुणवंता कम होती जा रही है। जिससे सांस लेने में कठिनाई हो रही है तथा वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड जैसी विषैली गैसों की मात्रा बढ़ती जा रही है। मानव ने खनिज और कच्चे माल के लिए कारखानों का निर्माण किया धातुओं को गलाने के लिए कोयले की भट्टिया जलाई तथा कारखानों की स्थापना करके चिमनियों से ढेर सारा धुआं आकाश में पहुंचाकर वायुमंडल को प्रदूषित किया है।

ध्वनि प्रदूषण –

ध्वनि प्रदूषण कार्य क्षेत्रों और सड़कों पर ज्यादा होता है जिससे ध्वनि प्रदूषण के कारण हमारे शांतिपूर्ण जीवन पर प्रभाव पढ़ रहा है। वाहनों के तीव्र ध्वनि से बजने वाले हॉर्न और साइरनो के करण कर्णभेदी ध्वनि से वातावरण प्रदूषित हो रहा है। मानव की वैज्ञानिक प्रगति के कारण कारखानों का निर्माण हुआ है जिसमें से आने वाली मशीनों की आवाजें तथा सड़कों पर चलने वाले वाहनों की आवाजें आज ध्वनि प्रदूषण का कारण बन गई है।

जल प्रदूषण –

जल प्रदूषण का मुख्य कारण उद्योगों और कृषि से निकलने वाले विभिन्न विषाणु और कीटाणुओं के प्रवास से हो रहा है। जिसने हमारे जल संसाधनों को प्रदूषित कर दिया है औद्योगिक क्षेत्रों में पानी का अधिक उपयोग होता है। इसके कारण विभिन्न विषाणुओं और कीटाणुओं का प्रवास हो रहा है कृषि के लिए उपयोग किए जाने वाले कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग जल प्रदूषण का मुख्य कारण बन रहा है जल संचालन की अधिकतम स्वच्छता और जिम्मेदारी की कमी भी जल प्रदूषण के कारणों में से एक है।

प्रदूषण का घातक प्रभाव

आधुनिक युग में संपूर्ण संसार पर्यावरण के प्रदूषण से पीड़ित है। हर सांस के साथ इसका जहर शरीर में प्रवेश कर रहा है और तरह-तरह की बीमारियां पनपती जा रही है इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि प्रदूषण की इस बढ़ती हुई गति से एक दिन यह पृथ्वी प्राणी तथा वनस्पतियों से रहित हो सकती है। सभ्यता तथा प्रगति एक बीती हुई कहानी बनकर रह जाएगी।

पर्यावरण शुद्धि हेतु वृक्षारोपण –

दिनों दिन बढ़ने वाले प्रदूषण के संकट से बचाव के लिए मार्ग खोजना आज के समय पर अति आवश्यक है इसके लिए वृक्षारोपण अत्यंत जरूरी है। वृक्षों की रक्षा करके इस महान संकट से छुटकारा पाया जा सकता है। यह हानिकारक गैसों के प्रभाव को नष्ट करके प्राणवायु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं भूमि के क्षरण को रोकते हैं और पर्यावरण में शुद्धता प्रदान करते हैं।

उपसंहार –

पर्यावरण की सुरक्षा को उचित संतुलन बनाए रखने के लिए हमें जागरूक और सचेत होना आवश्यक है जल,वायु, ध्वनि तथा पृथ्वी के प्रत्येक प्रकार के प्रदूषण को नियंत्रित कर धीरे-धीरे उसे समाप्त करना होगा।वास्तविकता यह है कि –

“ गफतल में डूबा मनुज नहीं जागेगा |
जल-वायु प्रदूषण भूत नहीं भागेगा || ”

पर्यावरण प्रदूषण FAQs

प्रदूषण के क्या प्रमुख प्रकार हैं?

प्रदूषण के प्रमुख प्रकार हैं – वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, और अन्य प्रकार।

प्रदूषण के क्या प्रभाव होते हैं?

प्रदूषण के प्रभाव में जलवायु परिवर्तन, जलवायु बदलाव, और वायुमंडलीय प्रदूषण के कारण होते हैं।

प्रदूषण को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है?

प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए हमें वनस्पति की रक्षा करनी चाहिए और वायु प्रदूषण को कम करने के लिए जलवायु संशोधकों का उपयोग करना चाहिए।

प्रदूषण के क्या कारण होते हैं?

प्रदूषण के कारणों में उद्योगिकीकरण, वाहनों का प्रयोग, और कचरे का बेहतर प्रबंधन शामिल हैं।

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