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बाजार दर्शन पाठ का सारांश

बाजार दर्शन | बाजार दर्शन के प्रश्न उत्तर | बाजार दर्शन पाठ का सारांश

लेखक जैनेंद्र कुमार के बारे में

जन्म – सन् 1905, अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश)

प्रमुख रचनाएँ

उपन्यास – परख, अनाम स्वामी, सुनीता, त्यागपत्र, कल्याणी, जयवर्द्धन, मुक्तिबोध।

कहानीसंग्रह – वातायन, एक रात, दो चिड़िया, फाँसी, नीलम देश की राजकन्या, पाज़ेब।

विचारप्रधान निबंधसंग्रह – प्रस्तुत प्रश्न, जड़ की बात, पूर्वोदय, साहित्य का श्रेय और प्रेय, सोच-विचार, समय और हम।

प्रमुख पुरस्कार – साहित्य अकादेमी पुरस्कार, भारत-भारती सम्मान। भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित।

निधन – सन् 1990 में

हिंदी में प्रेमचंद के बाद सबसे महत्त्वपूर्ण कथाकार के रूप में प्रतिष्ठित जैनेंद्र कुमार का अवदान बहुत व्यापक और वैविध्यपूर्ण है। अपने उपन्यासों और कहानियों के माध्यम से उन्होंने हिंदी में एक सशक्त मनोवैज्ञानिक कथा-धारा का प्रवर्तन किया।

परख और सुनीता के बाद 1937 में प्रकाशित त्यागपत्र ने इन्हें मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार के रूप में प्रभूत प्रतिष्ठा दिलाई। इसी तरह खेल, पाज़ेब, नीलम देश की राजकन्या, अपना-अपना भाग्य, तत्सत जैसी कहानियों को भी कालजयी रचनाओं के रूप में मान्यता मिली है।

कथाकार होने के साथ-साथ जैनेंद्र की पहचान अत्यंत गंभीर चिंतक के रूप में रही। बहुत सरल एवं अनौपचारिक-सी दिखनेवाली शैली में उन्होंने समाज, राजनीति, अर्थनीति एवं दर्शन से संबंधित गहन प्रश्नों को सुलझाने की कोशिश की है ।

अपनी गांधीवादी चिंतन-दृष्टि का जितना सुष्ठु एवं सहज उपयोग वे जीवन-जगत से जुड़े प्रश्नों के संदर्भ में करते हैं। वह अन्यत्र दुर्लभ है और वह इस बात का सबूत पेश करता है कि गांधीवाद को उन्होंने कितनी गहराई से हृदयंगम किया है।

बाजार दर्शन पाठ के बारे में

बाज़ार दर्शन जैनेंद्र कुमार का एक महत्त्वपूर्ण निबंध है, जिसमें गहरी वैचारिकता और साहित्य सुलभ लालित्य का दुर्लभ संयोग देखा जा सकता है।

हिंदी में उपभोक्तावाद एवं बाज़ारवाद पर व्यापक चर्चा पिछले एक-डेढ़ दशक पहले ही शुरू हुई है, पर कई दशक पहले लिखा गया जैनेंद्र का लेख आज भी इनकी मूल अंतर्वस्तु को समझाने के मामले में बेजोड़ है।

वे अपने परिचितों, मित्रों से जुड़े अनुभव बताते हुए यह स्पष्ट करते हैं कि बाज़ार की जादुई ताकत कैसे हमें अपना गुलाम बना लेती है। अगर हम अपनी आवश्यकताओं को ठीक-ठीक समझकर बाज़ार का उपयोग करें, तो उसका लाभ उठा सकते हैं।

लेकिन अगर हम ज़रूरत को तय कर बाज़ार में जाने के बजाय उसकी चमक-दमक में फँस गए तो वह असंतोष, तृष्णा और ईर्ष्या से घायल कर हमें सदा के लिए बेकार बना सकता है।

बाजार दर्शन के प्रश्न उत्तर / बाजार दर्शन mcq

1. बाजार दर्शन किसकी रचना है?

जैनेंद्र कुमार की

2. जैनेंद्र कुमार का जन्म कब हुआ था?

सन् 1905 में

3. जैनेंद्र कुमार की प्रमुख दो रचनाएं कौन कौनसी है?

एक रात, दो चिड़िया

4. जैनेंद्र कुमार को किन किन सम्मानों से सम्मानित किया गया?

साहित्य अकादमी पुरस्कार, भारत भारती और भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण पुरुस्कार।

5. जैनेंद्र कुमार का की मृत्यु कब हुई?

सन् 1990 में

6. जैनेंद्र कुमार किस प्रकार के उपन्यासकार थे?

मनोवैज्ञानिक उपन्यासकार

7. जैनेंद्र कुमार जी की तुलना हिंदी साहित्य के किस महान लेखक से की गई है?

मुंशी प्रेमचंद जी से

8. बाजार दर्शन पाठ की विधा क्या है?

निबंध

9. बाजार दर्शन पाठ में किसका उल्लेख मिलता है?

बाजार की चमक दमक का

10. मनीबैग का क्या अर्थ है?

पैसे की गरमी या एनर्जी

11. पर्चेजिंग पावर से क्या तात्पर्य है?

खरीदने की शक्ति

12. पैसा ….. क्या है?

पावर

13. बाजार दर्शन पाठ के अनुसार कौनसे लोग बुद्धिमान होते है?

संयमी लोग

14. बाजार की तुलना किससे की गई है?

शैतान का जाल

15. बाजार का आमंत्रण कैसा होता है?

मूक

16. असबाब का क्या अर्थ है?

सामान

17. परिमित का शाब्दिक अर्थ है?

सीमित

18. बाजार क्या है?

एक जादू

19. बाजार का जादू किस राह काम करता है?

आंख की राह

20. किस स्थिति में बाजार के जादू का असर खूब होता है?

जेब भरी हो, और मन खाली हो

21. लू में क्या पीकर जाना चाहिए?

पानी पीकर

22. बाजार की असली कृतार्थता क्या है?

आवश्यकता के समय काम आना

23. आधुनिक युग के प्रेमचंद किसे माना जाता है?

जैनेंद्र कुमार को

24. जैनेंद्र कुमार द्वारा रचित ‘ त्यागपत्र ‘ रचना कब प्रकाशित हुई?

सन् 1937 में

25. भारत सरकार द्वारा जैनेंद्र कुमार को किस सम्मान से सम्मानित किया गया?

पद्मभूषण

26. इच्छानिरोधस्तपः शब्द का क्या अर्थ है?

इच्छाओं का नाश करना, खत्म करना

27. बाजार का पोषण करने वाले अर्थशास्त्र को जैनेंद्र कुमार ने क्या बताया है?

अनीतिशास्त्र

28. ‘ जिसकी तुलना न की जा सके ‘ उसके लिए एक शब्द बताए?

अतुलित

29. चुंबक का जादू किस पर चलता है?

लोहे पर

30. शून्य होने का अधिकार किसे प्राप्त है?

ईश्वर को

31. भगत जी क्या बेचते थे?

चूरन

32. भगत जी चूरन बेचकर कितना पैसा कमाते थे?

छः आना

33. भगत जी के आगे कौन भीख मांगता है?

पैसा

34. भगत जी पर किसका जादू नहीं चलता है?

बाजार का

35. नाचीज़ का अर्थ है?

महत्वहीन, व्यर्थ

36. ‘ उपकार न मानने वाला ‘ के लिए एक शब्द बताए?

कृतघ्न

37. जो कभी पराजित न हो?

अजेय

38. लेखक के अनुसार कौन धन की ओर झुकता है?

निर्बल व्यक्ति

39. बाजार को कौनसा व्यक्ति सार्थकता प्रदान करता है?

जिसे पता है कि उसे बाजार में जाकर क्या खरीदना है।

40. बाजार दर्शन पाठ में लेखक का मित्र किसके साथ बाजार गया था?

स्वयं की पत्नी के साथ

41. तप की राह किसकी और जाती है?

रेगिस्तान की और

42. निर्मम का शाब्दिक अर्थ है?

जिसके मन में दया न हो

43. जैनेंद्र कुमार का जन्म कहां हुआ था?

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश

बाजार दर्शन में आने वाले कुछ शब्द और उनके शाब्दिक अर्थ

दरकार – जरूरत

पेशगी – अग्रिम राशि

अपदार्थ – जिसका अस्तित्व न हो

दारुण – भयंकर

अकींचित्कार – अर्थहीन

स्पृहा – इच्छा

पसोपेश – असमंजस

बाजार दर्शन पाठ का सारांश

बाजार दर्शन पाठ एक महत्वपूर्ण निबंध है जिसे जैनेंद्र कुमार ने लिखा है। जैनेंद्र कुमार को आधुनिक युग का प्रेमचंद भी कहा जाता है। बाजार दर्शन निबंध में जैनेंद्र कुमार बाजार के बारे में बताते है कि किस प्रकार बाजार का जादू हम पर चलता है।

लेखक ने बताया की बाजार हमे अपनी ओर आकर्षित करता है कि हम उसके जाल में आए और फसते चले जाए। बाजार शैतान का जाल है।

बाजार दर्शन पाठ के FAQS

बाजार दर्शन किस लेखक का महत्वपूर्ण निबंध है?

जैनेंद्र कुमार का। जिन्हे आधुनिक युग का प्रेमचंद भी कहा जाता है।

बाजार दर्शन पाठ का संदेश क्या है?

व्यक्ति को बाजार के जादू में कभी नहीं फसना चाहिए। बाजार शैतान का जाल है जिसमे व्यक्ति फसता चला जाता है।

बाजारूपन से क्या तात्पर्य है?

बाजार में रखी गई वस्तुओं की आवश्यकता न होकर भी उसे खरीदे जाना। बाजार का जादू प्रत्येक व्यक्ति पर चलता है परंतु जो उस जादू में नहीं फसता है वह संयम व्यक्ति होता है।

भगत जी पर बाजार का जादू क्यों नही चलता है?

बाजार का जादू भगत जी पर नहीं चल पाता है क्योंकि भगत जी केवल अपने काम की वस्तु लेने ही बाजार की एक दुकान पर जाते थे, वह पूरा बाजार नही घूमते थे। उन्हे केवल जीरा और नमक की आवश्यकता थी जो उन्हे पंसारी की दुकान पर मिल जाता था।

पर्चेजिंग पावर से क्या अभिप्राय है?

पर्चेजिंग पावर का शाब्दिक अर्थ है खरीदने की शक्ति। अर्थात् जब व्यक्ति की जेब में पैसा हो और मन खाली हो तो बाजार का जादू बहुत खूब तरीके से चलता है, इस स्थिति में व्यक्ति अपनी पर्चेजिंग पावर का इस्तेमाल करता है।

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