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रस की परिभाषा

रस की परिभाषा एवं प्रकार उदाहरण सहित | रस के अंग उदाहरण सहित

भारतीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ‘ रस ‘ शब्द का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट तत्व के लिए होता है। खाद्य पदार्थ और फलों के क्षेत्रों में रस का अर्थ मधुरतम तरल पदार्थ है। संगीत के क्षेत्र में कर्णेंद्रिय द्वारा प्राप्त आनंद का नाम ही रस है। अध्यात्म के क्षेत्र में स्वयं परमात्मा को ही रस माना गया है या रस को ही परमात्मा घोषित किया गया है – ‘ रसौ वै सः ‘ अर्थात् रस ही परमात्मा है।

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रस की परिभाषा 

किसी काव्य को या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने में पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे काव्य भाषा में ‘ रस ‘ कहा जाता है।

रस की अन्य परिभाषाएं / रस किसे कहते है?

  1. ‘रस’ शब्द रस् धातु और अच् प्रत्यय के मेल से बना है। संस्कृत वाङ्गमय में रस की उत्पत्ति ‘रस्यते इति रस’ इस प्रकार की गयी है अर्थात् जिससे आस्वाद अथवा आनन्द प्राप्त हो वही रस है। रस का शाब्दिक अर्थ है ‘आनन्द’। 
  2. “विभावानुभावव्यभिचारिसंयोगाद्रसनिष्पत्तिः।” अर्थात् विभाव, अनुभाव तथा व्यभिचारी भाव के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। इस प्रकार काव्य पढ़ने, सुनने या अभिनय देखने पर विभाव आदि के संयोग से उत्पन्न होने वाला आनन्द ही ‘रस’ है। साहित्य को पढ़ने, सुनने या नाटकादि को देखने से जो आनन्द की अनुभूति होती है, उसे ‘रस’ कहते हैं

रस के अंग या रस के अवयव

  1. स्थायीभाव
  2. विभाव
  3. अनुभाव
  4. संचारीभाव

यह पर विभाव के भी ओर दो प्रकार होते हैं –

  1. आलंबन
  2. उद्दीपन

इसी प्रकार आलंबन के भी ओर दो प्रकार होते हैं –

  • आश्रय
  • विषय

रस के अंग या रस के अवयव की परिभाषाएं

1. स्थायीभाव –

रस के प्रकार और स्थायी भाव

रसस्थायीभाव
श्रृंगार रसरति (प्रेम)
हास्य रसहास
करुण रसशोक
वीर रसउत्साह
रौद्र रसक्रोध
वीभत्स रसजुगुप्सा (घृणा)
भयानक रसभय
अद्भूत रसविस्मय
शांत रसनिर्वेद
वात्सल्य रसवत्सल

2. संचारीभाव –

आश्रय के चित्त में उत्पन्न होने वाले अस्थिर मनोविकारों को संचारीभाव कहते है। दया, आलस्य, चिंता, शंका, मोह आदि संचारी भाव है। संचारी भावों की कुल संख्या 33 मानी गई है।

33 संचारी भाव निम्नलिखित है –

  • निर्वेद
  • ग्लानि
  • शंका
  • असूया
  • मद
  • श्रम
  • आलस्य
  • देन्य
  • चिंता
  • मोह
  • स्मृति
  • घृति
  • ब्रीडा
  • चपलता
  • हर्ष
  • आवेग
  • जड़ता
  • गर्व
  • विषाद
  • औत्सुक्य
  • निद्रा
  • अपस्मार
  • स्वप्न
  • विबोध
  • अमर्ष
  • अविहित्था
  • उग्रता
  • मति
  • व्याधि
  • उन्माद
  • मरण
  • वितर्क

इन संचारी भावों के खोज भरतमुनि जी ने की है।

3. अनुभाव –

आश्रय की बाह्य शारीरिक चेष्टाओं के अनुभाव कहते है। अनुभाव के चार भेद होते है।

अनुभाव के चार भेद निम्न है –

  1. सात्विक
  2. कायिक
  3. मानसिक
  4. आहार्य

4. विभाव –

स्थायीभावों के उत्पन्न होने के कारणों को विभाव कहते है। विभाव के दो भेद है।

विभाव के दो भेद निम्न है –

  1. आलंबन
  2. उद्दीपन

आलंबन – जिन कारणों से आश्रय में स्थायी भाव जाग्रत होते है, आलंबन होता है।

आलंबन के भी ओर दो भेद होते हैं –

  • आश्रय – जिस व्यक्ति के मन में भाव जाग्रत हो।
  • विषय – जिसे देखकर मन के भाव जाग्रत हो।

उद्दीपन – भावों को लड़ाने या उद्दीपन करने वाले कारणों को उद्दीपन कहते है।

रस के प्रकार उदाहरण सहित | रस के भेद उदाहरण सहित

शृंगार रस की परिभाषा उदाहरण सहित

श्रृंगार रस की परिभाषा – सहृदय के ह्रदय में जब रति नामक स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव व संचारी भाव से संयोग होता है, तब श्रृंगार रस की उत्पत्ति होती है।

श्रृंगार रस की अन्य परिभाषा –
जहां नायक और नायिका के सौंदर्य और प्रेम संबंधित परिपक्व अवस्था को श्रृंगार रस कहते हैं। श्रृंगार रस के दो भेद होते हैं।

  1. संयोग श्रृंगार रस
  2. वियोग श्रृंगार रस

संयोग श्रृंगार रस – जहां नायक और नायिका का संयोगावस्था का वर्णन होता है, वहां संयोग श्रृंगार रस होता है।

उदाहरण –

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाय।
सौंह करे, भौंहनि हँसे, देन कहे नटि जाय।।

संयोग श्रृंगार रस का अन्य उदाहरण –

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।।

वियोग श्रृंगार रस – जहां नायक नायिका के बिछड़ने अर्थात वियोग अवस्था का वर्णन होता है, वहां वियोग श्रृंगार रस कहलाता है।

उदाहरण –

आंखों में प्रियमूर्ति थी, भूले थे सब भोग।
हुआ योग से भी अधिक, उसका विषम वियोग।।

वियोग श्रृंगार रस का अन्य उदाहरण –

प्रेम विवस मन कम्प, पुलक तनु नीरज नयन नीर भरे पिर के।
सकुचत कहत सुमिरि उर उमगत, सील सनेह सगुण गुण तिय के।।

हास्य रस की परिभाषा उदाहरण

हास्य रस की परिभाषा – सहृदय के ह्रदय में जब हास नामक स्थायीभाव का विभाव, अनुभाव व संचारीभाव से संयोग होता है, तब हास्य रस की उत्पत्ति होती है।

हास्य रस की अन्य परिभाषा –
जहां किसी व्यक्ति की विकृतवाणी, विकृत वेश, आकृति और चेष्टा जिसे सुनकर या देखकर हसीं उत्पन्न होती हो, वहा हास्य रस की निष्पत्ति होती है।

उदाहरण –

मैं महावीर हूं, पापड़ को तोड़ सकता हूं।
गुस्सा आ जाए तो कागज को मरोड़ सकता हूं।।

हास्य रस का अन्य उदाहरण –

हाथी जैसा देह, गैंडे जैसी चाल।
तरबूजे-सी खोपड़ी, खरबूजे-से गाल।।

करुण रस की परिभाषा उदाहरण सहित

करुण रस की परिभाषा – सहृदय के ह्रदय में जब शोक नामक स्थायीभाव का विभाव, अनुभाव और संचारीभाव से संयोग होता है, तो करुण रस की उत्पत्ति होती है।

करुण रस की अन्य परिभाषा –

प्रिय वस्तु के नाश और अनिष्ट की प्राप्ति से चित्त में जो विकलता आती है, वहां करुण रस होता है।

उदाहरण

देखी सुदामा की दीनदशा, करुणा करिकै करुणानिधि रोए।
पानी परात को हाथ धुयो नहिं नैनन के जल से पग सौ पग धोए।।

करुण रस का अन्य उदाहरण –

अभी तो मुकुट बँधा था माथ,
हुए कल ही हल्दी के हाथ।
खुले भी न थे लाज के बोल,
खिले थे चुम्बन शून्य कपोल॥
हाय रुक गया यहीं संसार,
बना सिन्दूर अनल अंगार।

वीर रस की परिभाषा उदाहरण सहित

वीर रस की परिभाषा – सहृदय के हृदय में जब उत्साह नामक स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव तथा संचारी भाव के साथ संयोग होता है, तब वीर रस की उत्पत्ति होती है।

वीर रस की अन्य परिभाषा – वीर रस में उत्साह स्थायी भाव होता है, युद्ध में विपक्षी को देखकर, ओजस्वी वीर घोषणाएं या वीरगति सुनकर तथा उत्साह वर्धक कार्यकलापों को देखने से वहां वीर रस जाग्रत होता है।

उदाहरण

वह खून कहो किस मतलब का,
जिसमें उबाल का नाम नहीं।
वह खून कहो किस मतलब का,
आ सके देश के काम नहीं।।

वीर रस का अन्य उदाहरण –

यमराज से भी युद्ध में, प्रस्तुत सदा मानो मुझे।
मामा तथा निज तात से भी युद्ध में डरता नहीं।।

रौद्र रस की परिभाषा उदाहरण सहित

रौद्र रस की परिभाषा – सहृदय के हृदय में जब क्रोध नामक स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव व संचारी भाव से संयोग होता है, तब रौद्र रस की निष्पत्ति होती है।

उदाहरण

संसार देख अब हमारे, शत्रु रण में मृत पड़े।
करते हुए यह घोषणा, वे हो गए उठकर खड़े।।

रौद्र रस का अन्य उदाहरण –

श्री कृष्ण के सुन वचन, अर्जुन क्रोध से जलने लगे।
सब शोक अपना भूल कर, करतल युगल मलने लगे।।

वीभत्स रस की परिभाषा उदाहरण सहित

वीभत्स रस की परिभाषा – जहां दुर्गंध युक्त वस्तुओं जैसे चर्बी, रुधिर आदि ऐसा वर्णन हो जिससे मन में घृणा उत्पन्न हो, तब वहां वीभत्स रस होता है।

उदाहरण

सिर पर बैठयो काग, आंख ओए खात निकारत।
खींचत जिभहि स्यार, अति आनन्द उर धारत।।

वीभत्स रस का अन्य उदाहरण –

आंतन की तांत बाजी खाल की मृदंग बाजी।
खोपरी की ताल, पशु पाल के अखारे में।।

भयानक रस की परिभाषा उदाहरण सहित

भयानक रस की परिभाषा – भय, भयानक रस का स्थायी भाव है। भयंकर प्राकृतिक दृश्यों को देखकर या उसका वर्णन सुनकर भय उत्पन्न होता है। वहां भयानक रस की निष्पत्ति होती है।

उदाहरण

हाहाकार हुआ क्रंदन भय, कठिन ब्रज होते थे चूर।
हुए दिगंत बधिर भीषण रव, बार बार होना यह क्रूर।।

भयानक रस का अन्य उदाहरण –

एक ओर अजगरहिं, एक ओर मृगराय।
विकल बटोही बीच ही, परयों मूरछा खाय।।

अद्भुत रस की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए

अद्भूत रस की परिभाषा – सहृदय के हृदय में जब विस्मय नामक स्थायी भाव का विभाव, अनुभाव व संचारी भाव से संयोग होता है, तो अद्भुत रस की निष्पत्ति होती है।

उदाहरण

बिनु पद चलइ सुनइ बिनु काना, कर बिनु कर्म करइ बिधिनाना।
आनन रहित सकल रस भोगी, बिनु वानी वकता बड़ जोगी।।

अद्भूत रस का अन्य उदाहरण –

पड़ी अचानक नदी अपार, घोड़ा कैसे उतरे पार।
राणा ने सोचा इस पार, तब तक चेतक था उस पार।।

शांत रस की परिभाषा उदाहरण सहित

शांत रस की परिभाषा – शांत रस का विषय वैराग्य व स्थायी भाव निर्वेद है, संसार की अनिश्चितता एवं दुःख की अधिकता को देखकर हृदय में जो विरक्ति उत्पन्न होती है, इस प्रकार की वर्णनों में शांत रस होता है।

उदाहरण

चलती चाकी देखकर, दिया कबीरा रोय।
दुइ पाटन के बीच में, साबुत बचा न कोय।।

शांत रस का अन्य उदाहरण –

जब मैं था तब हरी नाहीं, अब हरी है मैं नाहीं।
सब अँधियारा मिट गया, जब दीपक देख्या माहीं।।

वात्सल्य रस की परिभाषा उदाहरण सहित

वात्सल्य रस की परिभाषा – जहां शिशु के प्रति प्रेम, स्नेह, दुलार आदि का प्रमुखता से वर्णन किया जाता है, वहां वात्सल्य रस होता है। वात्सल्य रस का स्थायी भाव वत्सल होता है।

उदाहरण

धूरि भरे अति शोभित श्याम जू, तेजी बनी सिर सुंदर चोटी।
खेलत खात फिरे आंगना, पग पैंजनी बाजती पीरी कछोटी।।

वात्सल्य रस का अन्य उदाहरण –

मैया मोरी में नहीं माखन खायो।
बाल ग्वाल सब पीछे परिके बरबस मुख लपटाओ।।

स्थायी भाव और संचारी भाव में अंतर

स्थायी भावसंचारी भाव
सहृदय के हृदय में जो भाव स्थायी रूप से विद्यमान होते हैं, उन्हें स्थायी भाव कहते हैं।आश्रय के चित्त में उत्पन्न होने वाले अस्थिर मनोविकारों को संचारी भाव कहते है।
स्थायी भावों की संख्या कुल 10 है।संचारी भावों की कुल संख्या 33 है।
स्थायीभाव उद्दीपन के प्रभाव से उद्दीप्त होते है।संचारी भाव स्थायी भाव के विकास में सहायक होते है।

श्रृंगार रस और वीर रस में अंतर

श्रृंगार रसवीर रस
श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति है।वीर रस का स्थायी भाव उत्साह होता है।
श्रृंगार रस में आलंबन नायक और नायिका होते है।वीर रस का आलंबन शत्रु होता है।
श्रृंगार रस में माधुर्य गुण की प्रधानता होती है।वीर रस में ओज गुण की प्रधानता होती है।
श्रृंगार रस के दो प्रकार होते हैं – संयोग श्रृंगार रस, वियोग श्रृंगार रस।वीर रस का कोई अन्य प्रकार नहीं होता है।

प्रश्नों के उत्तर (FAQs)

रस के 10 प्रकार कौन कौनसे है?

रस के प्रकार –
श्रृंगार रस
हास्य रस
करुण रस
वीर रस
रौद्र रस
वीभत्स रस
भयानक रस
अद्भूत रस
शांत रस
वात्सल्य रस

रस कितने प्रकार के होते हैं?

10 प्रकार के, जिनके नाम इस प्रकार है
श्रृंगार रस
हास्य रस
करुण रस
वीर रस
रौद्र रस
वीभत्स रस
भयानक रस
अद्भूत रस
शांत रस
वात्सल्य रस

रस का मतलब क्या है?

भारतीय जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में ‘ रस ‘ शब्द का प्रयोग सर्वोत्कृष्ट तत्व के लिए होता है। खाद्य पदार्थ और फलों के क्षेत्रों में रस का अर्थ मधुरतम तरल पदार्थ है। संगीत के क्षेत्र में कर्णेंद्रिय द्वारा प्राप्त आनंद का नाम ही रस है। अध्यात्म के क्षेत्र में स्वयं परमात्मा को ही रस माना गया है या रस को ही परमात्मा घोषित किया गया है

‘ रसौ वै सः ‘ अर्थात् रस ही परमात्मा है। इसी प्रकार साहित्य के क्षेत्र में भी काव्य के आस्वादन से प्राप्त आनंद की प्राप्ति को ही रस की संज्ञा दी गई है। काव्यानंद को ही रस कहा गया है।

रस की परिभाषा क्या है?

किसी काव्य को या साहित्य को पढ़ने, सुनने या देखने में पाठक, श्रोता या दर्शक को जिस आनंद की अनुभूति होती है, उसे काव्य भाषा में ‘ रस ‘ कहा जाता है।

रस के अंग या अवयव कौन कौनसे है?

रस के अंग या रस के अवयव मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं जो निम्नलिखित है
स्थायीभाव
विभाव
अनुभाव
संचारीभाव

यह पर विभाव के भी ओर दो प्रकार होते हैं
आलंबन
उद्दीपन

इसी प्रकार आलंबन के भी ओर दो प्रकार होते हैं
आश्रय
विषय

हास्य रस का उदाहरण क्या है?

मैं महावीर हूं, पापड़ को तोड़ सकता हूं।
गुस्सा आ जाए तो कागज को मरोड़ सकता हूं।।

4 thoughts on “रस की परिभाषा एवं प्रकार उदाहरण सहित | रस के अंग उदाहरण सहित”

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