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श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग के वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर |Shrimad Bhagwat Gita karmyog का संदेश क्या है ?

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग पाठ के वस्तुनिष्ठ प्रश्न उत्तर तथा श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग का लघु परिचय और श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग पाठ का सार तथा उसका संदेश इस लेख में विस्तृत रूप से दिया गया है।

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग का लघु परिचय

आज मनुष्य सबसे ज्यादा कर्मशील है और श्रीकृष्ण को गीता जो कर्मयोग के माध्यम से कर्म के रहस्य को समझती है, वह आज के वर्तमान जीवन में मनुष्य के लिए सबसे ज्यादा कारगर सिद्ध हो सकती है। ये हजारों साल पुराना ग्रन्थ हमें आज के आधुनिक जीवन में जीने के लिए नया दृष्टिकोण दे सकता है।

आज मनुष्य क्षत्रिय के समान अपने रोजमर्रा की जिन्दगी में अर्जुन की तरह लगा हुआ है। बस समझने की जरूरत है, वो अपने काम को कैसे बिना आसक्त हुए अंजाम दे सकता हैं यानि कि बिना फल की चिन्ता किए हुए लाभ, हानि की व्यर्थ चिन्ता से दूर होकर काम करना, जिससे आप एक अध्याम की तरफ अग्रसर होंगे और एक मानसिक स्वास्थ्य को पाकर जीवन में परम आनन्द को प्राप्त होंगे।

इसी मार्ग से तुम उस परम सत्ता तक पहुंच सकते हो, चलो उठो और युद्ध करो तुम बिना फल की चिन्ता किए हुए युद्ध करो। इसी में तुम्हारा हित छिपा है, तुम ये मत सोचे कौन मेरा संगी साथी है, कौन पारिवारिक सदस्य है ? ये मत सोचो कि इनको मारकर मुझे सत्ता भोगने का क्या मजा आएगा। तुम युद्ध के बाद होने वाले लाभ-हानि की व्यर्थ चिन्ताओं में न पड़ो, तुम बिना आसक्त हुए अपना कार्य करो और तुम जो चाह रहे हो, उस परम ज्ञान को प्राप्त करना तो वो इसी मार्ग से प्राप्त होगा।’

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग के वस्तुनिष्ठ प्रश्न और उत्तर

1. कर्मयोग से क्या तात्पर्य है?

कर्म के माध्यम से योग

2. गीता का वक्ता कौन है?

संजय

3. गीता में कुल कितने अध्याय है?

18

4. गीता में कुल कितने श्लोक है?

700

5. महाभारत का युद्ध कितने दिनों तक चला?

18 दिन तक

6. गीता किसको किसने सुनाई?

भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को

7. भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता कहा सुनाई गई?

कुरुक्षेत्र की रणभूमि में

8. भगवान श्री कृष्ण द्वारा गीता किस दिन सुनाई गई?

रविवार को

9. जब गीता सुनाई गई थी उस दिन कौनसी तिथि थी?

एकादशी

10. गीता का दूसरा नाम क्या है?

गीतोपनिषद्

11. श्रीमद् भगवद् गीता का सार क्या है?

भगवान श्री कृष्ण की शरण लेना

12. Shreemad bhagwat gita की गिनती किन धर्म ग्रंथो में आती है?

उपनिषदों में

13. Shreemad bhagwat gita को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगों ने सुना?

राजा धृतराष्ट्र, संजय और भगवान हनुमान जी ने

14. श्रीमद् भगवद्गीता में मा शुचः का अर्थ क्या है?

शोक मत कर

15. श्रीमद् भगवद्गीता में कौनसा छंद का प्रयोग किया गया है?

अनुष्टुप छंद

16. गीता हमको किसके माध्यम से मिली?

राजा धृतराष्ट्र और संजय के माध्यम से

17. अर्जुन के रथ में कितने घोड़े थे?

चार

18. अर्जुन के रथ में किस रंग के घोड़े थे?

सफेद (श्वेत)

19. श्रीमद् भगवद्गीता में सूत पुत्र किसे कहा गया है?

कर्ण को

20. अर्जुन के रथ पर लगी ध्वजा का नाम क्या था?

कपिध्वज

21. अर्जुन की रथ पर लगा ध्वजा को कपिध्वज क्यों कहा जाता है?

क्योंकि ध्वजा पर वीर हनुमान जी का चित्र अंकित था

22. अर्जुन के धनुष का नाम क्या था?

गांडीव धनुष

23. गांडीव धनुष किस प्राणी के मेरुदंड से बना था?

गेंडा

24. धनंजय का अर्थ क्या है?

धन को जीतने वाला

25. एक अक्षौहिणी सेना में कितने सैनिक होते है?

2,18,700

26. कुरुक्षेत्र को किस नाम से जाना जाता है?

धर्म क्षेत्र

27. श्रीमद् भगवद्गीता का सर्वाधिक प्रचार कौनसी संस्था ने किया?

गीताप्रेस, गोरखपुर

28. गीता सुगीता कर्तव्या किसने कहा है?

श्री वेदव्यास जी ने

29. कर्मयोग किससे श्रेष्ठ है?

ज्ञान से

30. कर्म राजस का क्या अर्थ है?

फल की प्राप्ति के लिए किया गया परिश्रम

31. संजय शब्द का अर्थ क्या है?

सत्य की जय

32. अनुष्टुप छंद में एक श्लोक में कितने अक्षर आते है?

32 अक्षर

33. संजय शब्द का संधि विच्छेद क्या है?

सम् + जयः

34. पुनर्जन्म के सिद्धांत का उल्लेख श्रीमद्भागवत गीता के किस अध्याय में है?

अध्याय 2

35. प्रारब्ध कर्म क्या होते हैं?

वे कर्म जो संसार में जीवन तक के होते हैं

36. राजयोग का उद्देश्य क्या है?

मन को शांत करना

37. कौन से वाचिक और मानसिक कर्म सामान्यतः शुभ कहलाते हैं?

निष्काम कर्म

38. जो कर्म पहले से ही संचित करते हैं, उन्हे क्या कहा जाता है?

प्रारब्ध कर्म

39. कौनसे कर्म फल की इच्छा और आसक्ति के साथ किए जाते हैं?

सकाम कर्म

40. कौन से कर्म निः स्वार्थता और फल की अपेक्षा के बिना किए जाते हैं?

निष्काम कर्म

प्रेमभक्ति

42. श्रीमद् भगवद्गीता में अर्जुन ने कुल कितने श्लोक बोले?

85

43. श्रीमद् bhagwatgeeta में संजय ने कुल कितने श्लोक बोले?

40

44. श्रीमद् भगवद्गीता महाभारत के कौनसे पर्व में है?

भीष्म पर्व में

45. धृतराष्ट्र का अर्थ क्या है?

जिसने मोहयुक्त होकर बिना अधिकार राष्ट्र को पकड़ कर रखा है

46. महाभारत युद्ध में कौरवों के पास कितनी अक्षोहिणी सेना थी?

11 अक्षोहिनी सेना

47. महाभारत युद्ध में पांडवों के पास कितनी अक्षोहिणी सेना थी?

7 अक्षोहिणी सेना

48. महाभारत के युद्ध में कुल कितने सैनिक थे?

39,36,600

49. श्रीमद् भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को किन किन नामो से संबोधित किया?

पार्थ, पार्थसारथी, गुड़ाकोश, धनंजय, अर्जुन आदि

50. गुडाकेश का अर्थ क्या है?

नींद पर विजय पाने वाला

51. गीता में अर्जुन उवाच कितनी बार आया है?

20 बार

52. श्रीमद् भगवद्गीता में श्रीभागवानुवाच कितनी बार आया है?

27 बार

53. गीता का उपदेश कुरुक्षेत्र में किस स्थान पर दिया गया?

ज्योतिसर ग्राम, कुरुक्षेत्र

54. यूरोप के विख्यात दार्शनिक जो श्रृद्धा के कारण गीता को अपने साथ लेकर सोते थे?

इमर्सन

55. लोकमान्य तिलक ने जो गीता पर भाष्य लिखा है उसका नाम क्या है?

कर्मयोग शास्त्र

56. संत विनोबा भावे जी की गीता पर कौनसी पुस्तक प्रसिद्ध है?

गीता प्रवचन

57. गीता प्रवचन का मराठी भाषा में क्या नाम है?

गीताई (गीता मां)

58. मराठी में आई का क्या अर्थ है?

मां

59. गूढार्थ दीपिका के लेखक का नाम क्या है?

आचार्य मधुसूदन सरस्वती

60. महात्मा गांधी द्वारा लिखी गई गीता टीका का नाम बताओ?

अनासक्ति योग

61. कुरुक्षेत्र की आयु कितने वर्ष है?

19088 वर्ष

62. एक अक्षोहिणी सेना में पैदल सैनिकों की संख्या कितनी होती है?

109350 सैनिक

63. एक अक्षोहिणी सेना में घोड़े पर सवार सैनिकों की संख्या कितनी होती है?

65610 सैनिक

64. एक अक्षोहिणी सेना में रथ पर सवार सैनिकों की संख्या कितनी होती है?

21870 सैनिक

65. एक अक्षोहिणी सेना में हाथी पर सवार सैनिकों की संख्या कितनी होती है?

21870 सैनिक

66. श्रीमद् भगवद्गीता यथारूप ग्रंथ का विश्वभर में प्रचार करने वाली संस्था का नाम क्या है?

इस्कॉन (ISCON)

67. गीता मनीषी के नाम से किस संत को जाना जाता है?

स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज

68. गीता जयंती कब मनाई जाती है?

मार्गशीर्ष के शुक्ल पक्ष की एकादशी को

69. गीता ………… कर्तव्या?

सुगीता

70. अंतः करण कितने होते है?

चार

71. अंतः करण के नाम बताए?

मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार

72. बाह्यकरण की संख्या कितनी होती है?

दस

73. भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को कितने समय में श्रीमद् भगवद्गीता सुनाई?

45 मिनट में

74. गीता में धृतराष्ट्र में कितने श्लोक बोले?

एक

75. गेयम् गीता ……… ?

नामसहस्त्रम

Shrimad Bhagwat Gita कर्मयोग का सार

गीता के अनुसार जो कर्म निष्काम भाव से ईश्वर के लिए किए जाते हैं, वे बंधन नहीं उत्पन्न करते। वे मोक्ष रूप परमपद की प्राप्ति में सहायक होते हैं। इस प्रकार कर्मफल तथा आसक्ति से रहित होकर ईश्वर के लिए कर्म करना वास्तविक रूप से कर्मयोग है और इसका अनुसरण करने से मनुष्य को अभ्युदय तथा निःश्रेयस की प्राप्ति होती है। कर्मयोग के अनुसार मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए, फल प्राप्ति की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग का संदेश क्या है

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग FAQS

निष्काम भक्ति क्या है?

निष्काम भाव से की गयी भक्ति फलदायी होती है, जो मनुष्य अहंकार के वशीभूत होकर कर्म करता है, वह पाप का भागीदार बन जाता है। और जो निष्काम भाव से मेलजोल सुख-दुःख में दूसरों का सहयोग करता है वह ईश्वर के बहुत निकट पहुँच जाता है।

कर्म का उद्देश्य क्या है?

जो प्रकृति के नियमों का पालन करता है, वह परमात्मा के करीब है, लेकिन ध्यान रहे यदि परमात्मा भी मनुष्य के रूप में अवतरित होता है तो वह उन सारे नियमों का पालन करता है, जो सामान्य मनुष्यों के लिए हैं। प्रकृति के विरुद्ध न जाना कर्म का उद्देश्य है।

भगवत गीता का सार क्या है?

सारी गीता प्रश्नोत्तरी के रूप में है। अर्जुन प्रश्न करता है और कृष्ण भगवान उत्तर • देते हैं। कृष्ण भगवान ने गीता में प्रवचन नहीं किया है। पूछे गए प्रश्नों के उत्तर ही दिए हैं। वे प्रवचन करते ही नहीं हैं। अन्तिम विज्ञान व्याख्यान के रूप में नहीं होता, प्रश्नोत्तरी के रूप में होता है।

गीता में क्या क्या बताया गया है?

भक्ति-कर्म योग मार्गों की विस्तृत व्याख्या की गई है, इन मार्गों पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।

श्रीमद् भगवद्गीता कर्मयोग के अनुसार कर्म क्या है?

कर्म शब्द का उपयोग अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से किया जाता है। संस्कृत भाषा में ‘कर्म’ का अर्थ है ‘कार्य’ या ‘क्रिया’ । वे सारी क्रियाएँ जो न सिर्फ हम शरीर द्वारा करते हैं, लेकिन अपने मन और वाणी द्वारा भी करते हैं, उसे कर्म कहते हैं।

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