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सतपुड़ा के जंगल कविता

सतपुड़ा के जंगल कविता | satpuda ke jungle kavita

hinditoper.com द्वारा लिखे गए सतपुड़ा के जंगल कविता (satpuda ke jungle kavita) के इस लेख में सतपुड़ा के जंगल कविता, सतपुड़ा के जंगल कविता के कवि का जीवन परिचय(भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन परिचय), सतपुड़ा के जंगल कविता के वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तर आदि विस्तृत रूप से दिए गए हैं –

सतपुड़ा के जंगल कविता | satpuda ke jungle kavita

सतपुड़ा के जंगल कविता

सतपुड़ा के घने जंगल

नींद में डूबे हुए-से,

ऊँघते अनमने जंगल।

झाड़ ऊँचे और नीचे

चुप खड़े हैं आँख भींचे;

घास चुप है, काश चुप है

सड़े पत्ते, गले पत्ते,

हरे पत्ते, जले पत्ते,

वन्य पथ को ढँक रहे-से

पंक दल में पले पत्ते,

चलो इन पर चल सको तो,

दलो इनको दल सको तो,

ये घिनौने-घने जंगल,

सतपुड़ा के जंगल कविता

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

अटपटी उलझी लताएँ,

डालियों को खींच खाएँ,

पैरों को पकड़ें अचानक,

प्राण को कस लें कपाएँ,

साँप-सी काली लताएँ

बला की पाली लताएँ,

लताओं के बने जंगल,

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

मकड़ियों के जाल मुँह पर,

और सिर के बाल मुँह पर,

मच्छरों के दंश वाले,

दाग़ काले-लाल मुँह पर,

बात झंझा वहन करते,

चलो इतना सहन करते,

कष्ट से ये सने जंगल,

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

अजगरों से भरे जंगल

अगम, गति से परे जंगल,

सात-सात पहाड़ वाले,

बड़े-छोटे झाड़ वाले,

शेर वाले बाघ वाले,

गरज और दहाड़ वाले,

कंप से कनकने जंगल,

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

इन वनों के खूब भीतर,

चार मुर्गे, चार तीतर,

पाल कर निश्चिंत बैठे,

विजन वन के बीच बैठे,

झोंपड़ी पर फूस डाले

गोंड तगड़े और काले

जब कि होली पास आती,

सरसराती घास गाती,

और महुए से लपकती,

मत करती बास आती,

गूँज उठते ढोल इनके,

गीत इनके गोल इनके।

सतपुड़ा के घने जंगल

नींद में डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

जगते अँगड़ाइयों में,

खोह खड्डों खाइयों में

घास पागल, काश पागल,

शाल और पलाश पागल,

लता पागल, वात पागल,

डाल पागल, पात पागल,

मत मुर्गे और तीतर,

इन वनों के ख़ूब भीतर।

क्षितिज तक फैला हुआ-सा,

मृत्यु तक मैला हुआ-सा

क्षुब्ध काली लहर वाला,

मथित, उत्थित जहर वाला,

मेरु वाला, शेष वाला,

शंभु और सुरेश वाला,

एक सागर जानते हो?

ठीक वैसे घने जंगल,

नींद मे डूबे हुए-से

ऊँघते अनमने जंगल।

धँसो इनमें डर नहीं है,

मौत का यह घर नहीं है,

उतर कर बहते अनेकों,

कल-कथा कहते अनेकों,

नदी, निर्झर और नाले,

इन वनों ने गोद पाले,

लाख पंछी, सौ हिख-दल,

चाँद के कितने किरन दल,

झूमते बनफूल, फलियाँ,

खिल रहीं अज्ञात कलियाँ,

हरित दूर्वा, रक्त किसलय,

पूत, पावन, पूर्ण स्समय,

सतपुड़ा के घने जंगल

लताओं के बने जंगल।

भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन परिचय

सतपुड़ा के जंगल कविता

जन्म – 29 मार्च सन् 1913 में

मृत्यु – 20 फरवरी सन् 1985

प्रमुख रचनाएं – फसलें और फूल, मानसरोवर दिन, संप्रति, अंधेरी कविताएं आदि।

भाव पक्ष

सामाजिक भाव – भवानी प्रसाद मिश्र जी की कविता व्यक्तिवादी कविता नहीं है, वह समाज भाव से संपन्न है।

प्रगति चित्रण – भवानी प्रसाद मिश्र जी के काव्य रचनाओं में प्रकृति के सहज, मोहक और यथार्थ रूप का वर्णन विशेष रूप से उनकी रचनाओं में देखने को मिलता है।

कला पक्ष

भाषा – भवानी प्रसाद मिश्र जी की भाषा सरल, सहज और बोलचाल की भाषा है। उनकी भाषा में उनके अनुभवों की मौलिकता व ईमानदारी है।

शैली – भवानी प्रसाद मिश्र जी ने अपनी काव्य रचनाओं में आत्मीय, कलात्मक तथा बिम्ब प्रधान शैली का उपयोग किया है।

साहित्य में स्थान

साहित्य में स्थान – भवानी प्रसाद मिश्र जी की काव्य रचनाएं हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर है। मिश्र जी की रचनाएं हमें सदैव शब्द मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी। भवानी प्रसाद मिश्रा गांधी दर्शन से बहुत प्रभावित थे, इसलिए इन्हें कविता का गांधी भी कहा जाता है।

सतपुड़ा के जंगल कविता के वस्तुनिष्ठ प्रश्न-उत्तर

1. सतपुड़ा के जंगल कविता किसके द्वारा लिखी गई है?

भवानी प्रसाद मिश्र द्वारा

2. सतपुड़ा के जंगल कहां स्थित है?

होशंगाबाद में

3. सतपुड़ा के जंगल किस वर्ष स्थापित किए गए थे?

सन् 1981

4. सतपुड़ा के जंगल में कौन सी मिट्टी पाई जाती है?

काली मिट्टी

5. सतपुड़ा के जंगल में कौन सी नदी बहती है?

यमुना नदी

6. भवानी प्रसाद मिश्र जी का जन्म कहां हुआ था?

टिगरिया गांव, होशंगाबाद में

7. भवानी प्रसाद मिश्र जी का जन्म कब हुआ था?

29 मार्च सन् 1913 में

8. ‘घर से दूर’ भवानी प्रसाद मिश्र जी की रचना है?

सत्य

9. भवानी प्रसाद मिश्र किस युग के कवि हैं?

शुक्ल युग के

10. भवानी प्रसाद मिश्र जी की रचनाएं किस से संबंधित है?

गांधीवाद से

11. भवानी प्रसाद मिश्रा जी के पिताजी किस विभाग में कार्यरत थे?

शिक्षा विभाग में

12. ‘गीत फरोश’ किस साहित्यकार की रचना है?

भवानी प्रसाद मिश्रा जी

13. भवानी प्रसाद मिश्र को कविता का गांधी किसने कहा था?

कहानीकार उदय प्रकाश जी

14. भवानी प्रसाद मिश्र किस तार सप्तक के कवि थे?

द्वितीय तार सप्तक के प्रथम कवि

15. सतपुड़ा का क्या अर्थ है?

पर्वत श्रृंखला या पर्वतमाला

16. भवानी प्रसाद मिश्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार किस सन् में मिला?

सन् 1972

17. भवानी प्रसाद मिश्र को किस कृति के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था?

बुनी हुई रस्सी

18. भवानी प्रसाद मिश्र जी की मृत्यु कब हुई?

20 फरवरी सन् 1985

19. भवानी प्रसाद मिश्र जी की मृत्यु कहां हुई थी?

नरसिंहपुर

20. सतपुड़ा के जंगल कविता के अनुसार जंगल का रूप कैसा है?

जंगल के झाड़ ऊंचे और नीचे है

21. भवानी प्रसाद मिश्र जी की दो रचनाएं बताएं?

गीत फिरोज, गांधी पंचशती

22. भवानी प्रसाद मिश्र को प्रेम से किस नाम से पुकारा जाता था?

भवानी दादा

23. क्या भवानी प्रसाद मिश्र फिल्मों के संवाद भी लिखते थे?

हां

24. भवानी प्रसाद मिश्र किस प्रदेश के साहित्यकार हैं?

मध्य प्रदेश

25. भवानी प्रसाद मिश्र ने अपनी कविता “घर की याद” कहां रह कर लिखी थी?

जेल में रहकर

26. कविता का गांधी किसे कहा जाता है?

भवानी प्रसाद मिश्र जी को

27. भारत सरकार द्वारा भवानी प्रसाद मिश्र जी को कौन सा सम्मान प्राप्त है?

पद्मश्री

28. मध्य प्रदेश शासन द्वारा मिश्रा जी को कौन सा सम्मान प्राप्त है?

शिखर सम्मान सन् 1983 में

29. सतपुड़ा में कितनी श्रेणियां है?

सात

30. भवानी प्रसाद मिश्र ने कौन सा आंदोलन में भाग लिया था?

भारत छोड़ो आंदोलन

सतपुड़ा के जंगल कविता के FAQ

सतपुड़ा के जंगल किसकी रचना है

सतपुड़ा के जंगल कविता भवानी प्रसाद मिश्र के द्वारा लिखी गई है।

भवानी प्रसाद मिश्र को किसकी उपाधि प्राप्त है?

भवानी प्रसाद मिश्र को ‘कविता का गांधी’ उपाधि प्राप्त है।

भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म किस गांव में हुआ था?

भवानी प्रसाद मिश्र का जन्म टिगरिया गांव, होशंगाबाद में हुआ था।

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