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harishankar parsai ka jivan parichay

harishankar parsai ka jivan parichay | हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

hinditoper.com द्वारा लिखे गए harishankar parsai ka jivan parichay कक्षा 12 के इस लेख में हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय (harishankar parsai ka jivan parichay) दिया गया है, जिसमें हरिशंकर परसाई जी का जन्म, प्रमुख हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचनाएँ, निधन तथा हरिशंकर परसाई जी का जीवन परिचय संबंधित भाषा – शैली तथा साहित्य में स्थान निम्न है –

harishankar parsai ka jivan parichay-हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

जन्म – 22 अगस्त सन 1922, होशंगाबाद में (मध्य प्रदेश)

प्रमुख रचनाएं –

कहानी संग्रह : हंसते हैं रोते हैं, जैसे उनके दिन फिरे।

उपन्यास : रानी नागफनी की कहानी, तट की खोज।

निबंध संग्रह : तब की बात और थी, भूत के पांव पीछे, बेईमानी की परत, पगडंडियों का जमाना, सदाचार का ताबीज, शिकायत मुझे भी है, और अंत में।

व्यंग्य संग्रह (हरिशंकर परसाई की व्यंग्य रचनाएँ) : वैष्णव की फिसलन, तिरछी रेखाएं, ठिठुरता हुआ गणतंत्र, विकलांग श्रद्धा का दौर।

पत्रिका – वसुधा नामक पत्रिका, जबलपुर

प्रमुख सम्मान – हरिशंकर परसाई जी को ‘विकलांग श्रद्धा का दौर’ नामक रचना पर सन 1982 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

निधन – 10 अगस्त सन 1995 में, जबलपुर

विशेष – हरिशंकर परसाई जी हिंदी साहित्य जगत में एक अद्वितीय व्यंग्यकार के रूप में जाने जाते हैं।

हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

भाषा – हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

अपनी भाषा में मुहावरे तथा लोकोक्तियों का प्रयोग करके भाषा को नया आयाम दिया है। हरिशंकर परसाई जी की भाषा में चित्रों को अंकित करने तथा अर्थ को व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता है। परसाई जी ने अपनी रचनाओं में भाषा रूपी आभूषण को इस प्रकार सुसज्जित किया है कि पाठक द्वारा पढ़ने पर मिठास और अपनापन देखने को मिलता है। हरिशंकर परसाई जी की भाषा पात्रानुकूलता भी है।

शैली – हरिशंकर परसाई का जीवन परिचय

हरिशंकर परसाई जी ने अपनी रचनाओं में निम्न शैलियों का प्रयोग किया है :-

व्यंग्यात्मक शैली : हिंदी साहित्य जगत में विशेष व्यंग्यकार के रूप में विख्यात हरिशंकर परसाई जी ने व्यंग्यात्मक शैली का अनोखा प्रयोग किया है। इनकी अधिकतर रचनाएं इसी शैली पर आधारित है। इस शैली का प्रयोग कर हरिशंकर परसाई जी ने पाठकों तथा श्रोताओं के मन में अपनी एक विशेष छाप छोड़ी है।

भावात्मक शैली : हरिशंकर परसाई जी की रचनाएं भावों से ओत प्रोत रचनाएं हैं। मानव जीवन से संबंधित विभिन्न भावनाओं को प्रकट करने में हरिशंकर परसाई एक सफल लेखक हैं।

साहित्य में स्थान – harishankar parsai ka jivan parichay

साहित्य में स्थान – प्रसिद्ध व्यंग्यकार के रूप में विख्यात हरिशंकर परसाई जी की रचनाएं हिंदी साहित्य की अनमोल धरोहर हैं। परसाई जी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से कई पाठकों के मन को प्रफुल्लित किया है तथा उनके हृदय में अपना स्थान बनाया है। आपकी रचनाओं के लिए हिंदी साहित्य सदैव ऋणी रहेगा। हिंदी साहित्य में जब भी व्यंग्यात्मक रचनाओं की बात होगी स्मृति पटल पर आपका नाम सर्वप्रथम आएगा।

FAQ – harishankar parsai ka jivan parichay

हरिशंकर परसाई जी ने अपनी रचनाओं में प्रमुखता किस शैली को अपनाया है?

हरिशंकर परसाई जी ने अपनी रचनाओं में प्रमुखता व्यंग्यात्मक शैली को अपनाया है। इनकी अधिकतर रचनाएं इसी शैली पर आधारित है।

वसुधा नामक पत्रिका के संपादक कौन थे?

वसुधा नामक पत्रिका के संपादक हरिशंकर परसाई जी थे, जिन्होंने इस पत्रिका की शुरुआत जबलपुर से की थी।

रानी नागफनी की कहानी किसकी रचना है?

रानी नागफनी की कहानी हरिशंकर परसाई जी की रचना है, जिसकी विधा उपन्यास है।

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