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7 layers of OSI model in Hindi

OSI model in Hindi | difference between TCP/IP and OSI model in Hindi

Hinditoper.com द्वारा लिखे गए OSI model in Hindi के इस लेख में OSI मॉडल किसे कहते है? दिया गया है, साथ ही साथ OSI मॉडल की सभी सात लेयर्स के बारे में बताया गया है और difference between TCP/IP and OSI model in Hindi भी दिया गया है जो कि निम्न है –

OSI model in computer network in Hindi

OSI model एक theoretically model है, अर्थात इसे पढ़ कर समझा जा सकता है कि किस प्रकार कंप्यूटर नेटवर्क या नेटवर्क में उपयोग आने वाले प्रोटोकॉल्स काम करते है। इसकी सात लेयर्स से नेटवर्किंग प्रोटोकॉल्स की विस्तृत जानकारी मिलती है। इस मॉडल से यह भी पता लगता है नेटवर्क में जो नोड्स होते है वे डाटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में किस प्रकार भेजते है।

OSI मॉडल का उपयोग नेटवर्क डिजाइन में करने से कंप्यूटर नेटवर्क अधिक सुरक्षित तथा बेहतर परफॉर्मेंस प्रदान करता है। इसमें सभी लेयर्स की अपनी अपनी विशेष जिम्मेदारियां होती है।

7 layers of OSI model in Hindi

OSI मॉडल की सात लेयर्स के नाम निम्न है –

  • Application layer (अनुप्रयोग परत)
  • Presentation layer (प्रेजेंटेशन परत)
  • Session layer (सत्र परत)
  • Transport layer (ट्रांसपोर्ट परत)
  • Network layer (नेटवर्क परत)
  • Data link layer (सूचना श्रंखला परत)
  • Physical layer (भौतिक परत)

OSI मॉडल की सभी सात लेयर्स को विस्तृत से समझते है और प्रत्येक लेयर में उपयोग होने वाले प्रोटोकॉल्स की भी जानकारी प्रदान करते है।

1. Physical layer in OSI model in Hindi

Physical layer in OSI model in Hindi – physical layer OSI मॉडल की सातवी लेयर है। इसे lower layer के नाम से भी जाना जाता है। फिजिकल लेयर डाटा बिट्स को ट्रांसमिशन मीडिया का इस्तेमाल करके डाटा को ट्रांसफर करती है। यह लेयर डाटा को सिग्नल्स में कन्वर्ट कर देती है, जिससे डाटा तेज स्पीड में केबल्स के माध्यम से ट्रांसमिट हो सके।

कार्य – function of physical layer in Hindi

1. केबल्स का चयन – डाटा सिग्नल के अनुरूप यह केबल्स का चयन करती है।

2. टोपोलॉजी – लेन नेटवर्क में जुड़े कंप्यूटर किस प्रकार व्यवस्थित ढंग से जुड़े रहेंगे यह भी सुनिश्चित करती हैं।

3. ट्रांसमिशन मोड – डाटा को ट्रांसफर करते समय केबल का ट्रांसमिशन मोड कैसा है यह भी ध्यान में रखती है।

2. Data link layer in OSI model in computer network in Hindi

Data link layer in OSI model in Hindi – डाटा लिंक लेयर OSI मॉडल की छठी लेयर है अर्थात सेकंड लास्ट लेयर है। डाटा को एक नोड से दूसरे नोड में ट्रांसफर करने के लिए डाटा लिंक लेयर MAC address को फॉलो करती है ताकि डाटा सही नोड के पास पहुंच सके।

डाटा लिंक लेयर, डाटा को सीधे फाइनल नोड या रिसीवर के पास नही पहुंचती है बल्कि उसे अपने आगे वाले नोड को ट्रांसफर करती है फिर आगे वाला नोड अपने आगे वाले नोड को ट्रांसमिट करता है। यह क्रम फाइनल नोड न आने तक चलता रहता है।

कार्य – function of Data link layer in Hindi

1. Flow control – डाटा लिंक लेयर डाटा के फ्लो को भी कंट्रोल करती है। अर्थात डाटा को सामान्य स्पीड में ट्रांसमिट करती है।

2. Error checking – डाटा लिंक लेयर एरर आने पर CRC, Parity method का उपयोग करती है।

3. Hop to Hop data transmission – यह लेयर डाटा को one by one node को कवर करते करते डाटा को आगे ट्रांसफर करती है।

3. Network layer in OSI model in Hindi

Network layer in OSI model in Hindi – नेटवर्क लेयर OSI मॉडल की पांचवी लेयर है। यह लेयर MAC address के साथ साथ IP address को भी फॉलो करती है। यह लेयर कंप्यूटर नेटवर्क में हो रहे डाटा को ट्रांसफर करने के लिए उचित path का चयन करती है, ताकि डाटा ट्रांसमिशन समय पर हो सके। नेटवर्क लेयर में डाटा पैकेट्स के फॉर्म में होता है।

नेटवर्क लेयर मुख्य रूप से IP, RIP, DDP आदि प्रोटोकॉल्स को फॉलो करती है।

कार्य – function of Network layer in Hindi

1. Choose best route – यह डाटा ट्रांसमिशन के लिए बेस्ट रूट का निर्णय लेती है।

2. Fragments to packets – यह लेयर डाटा को फ्रैगमेंट से पैकेट्स में कन्वर्ट करती है।

3. Address serving – नेटवर्क लेयर डाटा पैकेट्स को सोर्स और डेस्टिनेशन एड्रेस प्रदान करती है।

4. Transport layer in OSI model in computer network in Hindi

Transport layer in OSI model in Hindi – ट्रांसपोर्ट लेयर OSI मॉडल की चौथी लेयर है। यह लेयर कंप्यूटर नेटवर्क में उपस्थित सभी कम्प्यूटर्स के बीच कनेक्शन को स्थापित करती है। यह लेयर सेशन लेयर से आए डाटा को सेगमेंट्स में परिवर्तित करती है ताकि डाटा fastly transmit हो सके।

Transport layer में मुख्य रूप से UDP, TCP प्रोटोकॉल्स का उपयोग किया जाता है। ट्रांसपोर्ट लेयर द्वारा TCP प्रोटोकॉल का उपयोग डाटा ट्रांसमिशन के दौरान तब किया जाता है जब नेटवर्क में कनेक्शन स्थापित हो। अन्यथा UDP प्रोटोकॉल का उपयोग किया जाता है।

कार्य – function of Transport layer in Hindi

1. Traffic control – यह लेयर डाटा ट्रांसमिशन के दौरान traffic का भी ध्यान रखती है, ताकि डाटा सेगमेंट्स एक जगह पर इक्कठे न हो।

2. Flow control – ट्रांसपोर्ट लेयर डाटा के फ्लो को भी कंट्रोल करती है, जिसके लिए यह sliding window protocol को फॉलो करती है।

3. Error control – यह लेयर upper layer से आने वाले डाटा में एरर्स को भी चेक करती है, जिसके लिए यह checksum और error detecting method का उपयोग करती है।

5. Session layer in OSI model in Hindi

Session layer in OSI model in Hindi – Session layer OSI मॉडल की पांचवी लेयर है। सेशन लेयर का काम डाटा को ट्रांसफर करते समय सेंडर तथा रिसीवर के बीच कनेक्शन को बनाना होता है। यदि किसी कारणवश डाटा ट्रांसमिशन के दौरान ट्रांसमिशन रुक जाता है तो फिर से उसी प्वाइंट से डाटा ट्रांसमिट हो यह जिम्मेदारी सेशन लेयर की होती है।

कार्य – function of Session layer in Hindi

1. Data recovery – यदि किसी कारणवश डाटा ट्रांसमिशन के समय डाटा ट्रांसमिशन रुक जाता है तो यह लेयर डाटा को रिकवर करती है।

2. Connection established – यह लेयर नेटवर्क में कंप्यूटर के बीच कनेक्शन को भी स्थापित करती है। ताकि डाटा आपस में शेयर किया जा सके।

6. Presentation layer in OSI model in Hindi

Presentation layer in OSI model in Hindi – Presentation layer OSI मॉडल की 6 लेयर है। यह लेयर एप्लीकेशन लेयर से प्राप्त डाटा को सिंपल तथा uncomplicated form में कन्वर्ट करती है। और डाटा को सुरक्षित रखने के लिए डाटा पर encryption decryption operations भी परफॉर्म करती है। और प्रेजेंटेशन लेयर की डाटा को compress करने की भी जिम्मेदारी होती है।

कार्य – function of Presentation layer in Hindi

1. Data representation – यह लेयर डाटा को American Standard Code for Information Interchange (ASCII) तथा Binary Coded Decimal (BCD) में प्रेजेंट करती है।

2. Data compression – यह लेयर डाटा को compress करती है ताकि डाटा आसानी से तथा फास्ट स्पीड में ट्रांसमिट हो सके।

3. Data security – डाटा की सिक्योरिटी के लिए प्रेजेंटेशन लेयर AFP, ICA, LPP protocol का use करती है।

7. Application layer in OSI model in computer network in Hindi

Application layer in OSI model in Hindi – Application layer OSI मॉडल की पहली लेयर है। इसे upper layer के नाम से भी जाना जाता है। Application layer एक इंटरफेस की तरह काम करती है अर्थात यूजर आसानी से सिस्टम एप्लीकेशन को एक्सेस कर सके उसके लिए user friendly interface प्रदान करती है। यह लेयर यूजर को वेब ब्राउजर एप्लीकेशन के माध्यम से सर्वर से जोड़ती है।

OSI model in Hindi - Application layer

Application layer में मुख्य रूप से TELNET, HTML, SMTP, DNS प्रोटोकॉल्स का उपयोग किया जाता है।

कार्य – function of Application layer in Hindi

1. Easy to interact – यह लेयर यूजर को एप्लीकेशन से easily interact करवाती है।

2. Operation performance – यह लेयर यूजर को एप्लीकेशन पर download, upload, delete जैसे ऑपरेशन करने की अनुमति देती है।

3. Data serving – यह सही यूजर को सही डाटा देने के लिए भी जिम्मेदार होती है।

difference between TCP/IP and OSI model in computer network in Hindi

TCP IP मॉडल तथा OSI मॉडल में मुख्य अंतर तालिका के माध्यम से निम्न है-

TCP/IP modelOSI model
TCP IP का पूरा नाम Transmission Control Protocol / Internet Protocol होता है।OSI model का पूरा नाम Open System Interconnection होता है।
TCP IP model में चार लेयर्स होती है।OSI model में सात लेयर्स होती है।
TCP IP model अधिक reliable होता है।OSI model कम reliable होता है।
TCP IP model को सन 1970 से सन 1980 के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग के द्वारा विकसित किया गया था।OSI मॉडल को सन 1984 में ISO नामक संस्थान ने डेवलप किया था।
TCP IP model, Horizontal Approach को फॉलो करता है।OSI model Vertical Approach को फॉलो करता है।

FAQ – OSI model in computer network in Hindi

OSI मॉडल किसे कहते है?

OSI मॉडल का पूरा नाम Open System Interconnection होता है। यह मॉडल सात लेयर्स का एक समूह होता है। OSI मॉडल को सन 1984 में ISO नामक संस्थान ने डेवलप किया था।

नेटवर्क लेयर का क्या कार्य होता है?

नेटवर्क लेयर डाटा ट्रांसमिशन के लिए बेस्ट रूट का निर्णय लेती है। नेटवर्क लेयर डाटा पैकेट्स को सोर्स और डेस्टिनेशन एड्रेस प्रदान करती है।

TCP IP मॉडल तथा OSI मॉडल में मुख्य अंतर क्या है?

TCP IP model में चार लेयर्स होती है जबकि OSI model में सात लेयर्स होती है।

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